प्रिय आचार्य बलवन्त, आपकी हर कविता, हर दोहा, हर क्षणिका बड़ी ही मार्मिक है। वो हृदय को बड़ी ही गहराई तक स्पर्श करती है। आप जन्मजात कवि हैं। कविता आपके भीतर पूरी तरह फूटती है जैसे कि धरती से चश्मे फूट...
प्रिय आचार्य बलवन्त, आपकी हर कविता, हर दोहा, हर क्षणिका बड़ी ही मार्मिक है। वो हृदय को बड़ी ही गहराई तक स्पर्श करती है। आप जन्मजात कवि हैं। कविता आपके भीतर पूरी तरह फूटती है जैसे कि धरती से चश्मे फूट पड़ते हैं। आपको मेरी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।