देवेश पथ सारिया एक हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक हैं। कविता संकलन : अदृश्य आत्मीय की टोह में (2025), नूह की नाव (2022)। कथेतर गद्य : छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी, 2022)। कहानी...
देवेश पथ सारिया एक हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक हैं। कविता संकलन : अदृश्य आत्मीय की टोह में (2025), नूह की नाव (2022)। कथेतर गद्य : छोटी आँखों की पुतलियों में (ताइवान डायरी, 2022)। कहानी संग्रह : स्टिंकी टोफू (2025)। अनुवाद : सपने बुनता फाॅरमोसा : ताइवानी कविताएँ (2026), यातना शिविर में साथिनें (2023), यथार्थ में एक दरार (2021, 2026)। अन्य भाषाओं में पुस्तकें : A Toast to Winter Solstice (अंग्रेज़ी अनुवाद : शिवम तोमर)। पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023), स्नेहमयी चौधरी सम्मान (2025)। रचना अनुवाद : देवेश की रचनाओं के अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन (चीनी), स्पेनिश, रूसी, अरबी, ताइवानी, नेपाली, उर्दू, बांग्ला, मलयालम, मराठी, पंजाबी, असमिया, भोजपुरी, राजस्थानी, हरियाणवी, गढ़वाली और कुमाऊँनी में हुए हैं। संपादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका (golchakkar.org) युवा कवि-गद्यकार देवेश पथ सारिया ने अपने जीवन का एक लंबा हसूस किया और जिया है। उन्हीं अनुभवों से पगी यह पुस्तक संस्मरण और डायरी विधा के बीच आवाजाही करती हुई ताइवान के शहर 'शिन चू' का एक खूबसूरत कोलाज रचती है। इसमें शहर की सभ्यता-संस्कृति, ऐतिहासिक इमारतों के स्थापत्य और शिल्पकला से लेकर भौतिकवादी जीवन की विविध छवियाँ हैं, जिनमें बाजार की संरचना से लेकर नाइट क्लबों और बार की गहमागहमी तक शामिल है। देवेश पथ सारिया अपने इन संस्मरणों में बहुत छोटी-छोटी घटनाओं और चरित्रों को गहरे तक देखते हैं और फिर पूरी तन्मयता से उन्हें शब्दों में रचते हैं। यही सूक्ष्म दृष्टि, अनुभवों की प्रामाणिकता और विवरणों की जीवंतता इस पुस्तक को बेहद रोचक बनाती है। अनुभवी अनुवादक भंवरलाल सुथार ने राजस्थानी पाठसमय ताइवान में बिताया है। इस दौरान उन्होंने ताइवान को उसकी सभ्यता, संस्कृति और जीवनशैली के साथ अपनी आत्मा की गहराइयों से मकों के लिए इसका अर्थवत्तापूर्ण अनुवाद किया है।