*टांय-टांय फिस्स* व्यंग्य की सार्थकता केवल हंसाने में नहीं, बल्कि विसंगतियों को पहचानने और उन पर विचार करने में भी है। डॉ. नीरज दइया का यह व्यंग्य-संग्रह इसी साहित्यिक विधा में रुचि रखने वाले पाठकों...
*टांय-टांय फिस्स* व्यंग्य की सार्थकता केवल हंसाने में नहीं, बल्कि विसंगतियों को पहचानने और उन पर विचार करने में भी है। डॉ. नीरज दइया का यह व्यंग्य-संग्रह इसी साहित्यिक विधा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए महत्त्वपूर्ण है। सामाजिक जीवन के विद्रूप और व्यंग्य की प्रभावशीलता को समझने के इच्छुक पाठक इस पुस्तक के माध्यम से लेखक की व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति से परिचित हो सकते हैं।