*ऊंडै अंधारै कठैई* हिंदी के प्रतिष्ठित कवि आलोचक डॉ. नन्दकिशोर आचार्य की चयनित कविताओं का डॉ. नीरज दइया द्वारा किया गया राजस्थानी अनुवाद। यह पुस्तक हिंदी कविता की महत्त्वपूर्ण रचनाओं को राजस्थानी...
*ऊंडै अंधारै कठैई* हिंदी के प्रतिष्ठित कवि आलोचक डॉ. नन्दकिशोर आचार्य की चयनित कविताओं का डॉ. नीरज दइया द्वारा किया गया राजस्थानी अनुवाद। यह पुस्तक हिंदी कविता की महत्त्वपूर्ण रचनाओं को राजस्थानी भाषा के पाठकों तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है। कविता का अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं, बल्कि उसकी संवेदना, लय और अर्थ-गहराई को दूसरी भाषा में सहेजने का कार्य भी है। हिंदी और राजस्थानी कविता के बीच साहित्यिक संवाद को समझने तथा नन्दकिशोर आचार्य की काव्य-दृष्टि से परिचित होने के लिए यह पुस्तक विशेष महत्त्व रखती है।